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Apple, सैमसंग, विवो, एचपी और मोटोरोला सहित 10 टेक कंपनियों के करीब 5000 करोड़ रुपये के प्रीमियम स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक मर्चेंडाइज कस्टम विभाग के पास अटके हुए हैं।
इसकी वजह यह है कि ई-वेस्ट से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने इनके इंपोर्ट पर्मिट वापस ले लिए हैं।
सरकार ने एक्सटेंडेड प्रोड्यसूर रिस्पॉन्सिबिलिटी से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने पर 10 कंपनियों के इंपोर्ट पर्मिट सस्पेंड कर दिए हैं। ये नियम ई-वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े प्रावधानों का हिस्सा हैं। सरकार ने यह कदम 4 अप्रैल से लागू एक नोटिफिकेशन के जरिए उठाया। उसके बाद से यह मसला सुलझाने के लिए कंपनियां इन्वाइरनमेंट मिनिस्ट्री से कई बार बातचीत कर चुकी हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गतिरोध बने रहने से अप्रैल-जून क्वॉर्टर में बिक्री प्रभावित हो सकती है।
मिनिस्ट्री ऑफ इन्वाइरनमेंट, फॉरेस्ट्स एंड क्लाइमेट चेंज के सेक्रेटरी सी के मिश्रा ने कहा, ‘इन कंपनियों ने अपनी बात हमसे कही है। उन्होंने भी माना है कि नियमों के पालन का ही मसला है।’ उन्होंने कहा, ‘इस बीच हम यह देख रहे हैं कि उन्होंने सही दिशा में कदम बढ़ाया है या नहीं। मिनिस्ट्री ने सीपीसीबी से कंपनियों के वादों पर गौर करने और मसला सुलझाने के तरीके तलाशने को कहा है।’
हालांकि कंपनियों का दावा है कि इंपोर्ट पर्मिट वापस लेने का सीपीसीबी का निर्णय नियमों के उल्लंघन के स्तर के लिहाज से ज्यादा कड़ा है, खासतौर से यह देखते हुए कि उन्होंने (कंपनियों ने) ई-वेस्ट कलेक्शन अपने टारगेट से ज्यादा किया है। कंपनियों का कहना है कि उन्होंने जिन नियमों का पालन नहीं किया, वे बहुत छोटे मसलों से जुड़े हैं। कंपनियों का कहना है कि कोई सेंटर बंद करने और दूसरा खोलने से पहले संबंधित अधिकारियों से इजाजत नहीं लेने और पोस्टर लगाने सहित जागरूकता बढ़ाने के दूसरे उपाय अपने सेंटरों पर नहीं करने जैसे मामलों में ही उनसे चूक हुई है।
इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा, ‘हमारा मानना है कि ई-वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का दायरा कुछ ज्यादा ही बढ़ाकर ऐक्शन लिया गया है। ई-वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स भारत के ट्रेड इन्वाइरनमेंट के अनुसार नहीं हैं, फिर भी इंडस्ट्री ने उनका पालन करने की कोशिश की है।’
आईसीईए ने सेक्रेटरी को लेटर लिखकर इंपोर्ट पर्मिट सस्पेंड करने के मसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। ऐपल, विवो और मोटोरोला आईसीईए की मेंबर हैं।
मोहिंद्रू ने कहा, ‘यह ऑर्डर आने के एक हफ्ते के भीतर कस्टम्स के पास करीब 5000 करोड़ रुपये का मर्चेंडाइज फंस चुका है। इसमें फिनिश्ड प्रोडक्ट्स और रॉ मटीरियल शामिल हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर यह गतिरोध जारी रहा और सरकार ने अपना आदेश जल्द वापस नहीं लिया तो इन कंपनियों के क्वॉर्टर्ली शिपमेंट पर बड़ी चोट लगेगी।’
इन्वाइरनमेंट मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने ईटी से कहा कि उल्लंघन इतने छोटे भी नहीं हैं, जैसा कि कंपनियां बता रही हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘यह कौन सी बात हुई कि हर बार पकड़े जाने पर आप छह महीने का समय मांगने लगें। ई-वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स दिसंबर 2016 से लागू हैं। क्या वे इसी तरह की गड़बड़ी किसी विकसित देश में कर सकती हैं?’
-एजेंसियां

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